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संसदीय सिमितियाँ /Parliamentary Committees -Indian Polity

संसदीय सिमितियाँ -

संसद एक बहुत बड़ी संस्था है जोकि अपने समक्ष  लाये गए मामलों का प्रभावी रूप से स्वयं निपटारा नहीं कर सकती है संसद के कई और कठिन एवं पर्याप्त समय ना होने के कारण अनेक सिमितियों का गठन उसकी मदत के लिए किया जाता है जोकि संसदीय काम काज को प्रभाविरूप से करने में उसकी मदत करती हैं। 
इनके गठन एवं कार्यकाल का कोई विशेष प्रावधान नहीं है इन सब मामलों में संसद के दोनों सदनों के नियम ही प्रभावी होते हैं इस प्रकार संसदीय सिमित यह सिमित होती है जो सदन  द्वारा नियुक्त एवं निर्वाचित होती है जिसके सदस्यों को लोकसभा अध्यक्ष एवं सभापति नामित करते हैं ,और इनके निर्देशनुसार कार्य करती है ,सिमितियाँ अपनी रिपोर्ट सदन को या लोकसभा अध्यक्ष या सभापति को सौंपती हैं। 

सिमितियों का वर्गीकरण -

आमतौर पर संसदीय सिमितियाँ दो प्रकार की होती हैं स्थाई एवं तदर्थ यानी अस्थाई स्थाई सिमितियाँ स्थाई होने की वजह से निरंतरता के साथ काम करती हैं जिनका गठन हर वर्ष किया जाता है वहीँ अस्थाई सिमितियाँ जिस प्रयोजन से इनका गठन किया जाता है प्रयोजन समाप्त होते ही खुद ब खुद समाप्त हो जाती हैं। 

लोकलेखा सिमित-

इसका गठन 1921 में किया गया था इसमें 22 सदस्य है 15 लोकसभा से एवं 7 राजयसभा से इनका चुनाव प्रतिवर्ष संसद द्वारा इसके सदस्यों में से समानुपातिक सिद्धांत के अनिसार एकल हस्तांतरणीय मत के माध्यम से किया जाता है और सदस्यों का कार्यकाल एक वर्ष का  होता है और सिमित में किसी मंत्री का निर्वाचन नहीं हो सकता है एवं सिमित के अध्यक्ष की नियुक्ति लोकसभा अध्यक्ष के द्वारा लोकसभा सदस्यों में से किया जाता है जोकि विपछि दल से होता है। 
सिमित का कार्य महालेखा परीक्षक के प्रतिवेदनों की जांच करना है जोकि राष्ट्रपति द्वारा संसद में पेश किया जाता है जोकि तीन प्रतिवेदन होते हैं विनियोग,वित्त,एवं सार्वजनिक उद्द्मों पर लेखा प्रतिवेदन ,सिमित सार्वजनिक ब्यय में अनियमिता की जांच अर्थब्यवस्था को ध्यान में  रखकर करती है। 

प्राक्लन सिमित-  

इसका गठन 1950 में किया गया जिसके सदस्यों की संख्या 30 है और सारे सदस्य लोकसभा से होते हैं जिसके सदस्यों का चुनाव लोकसभा द्वारा अपने सदस्यों में से किया जाता है जिसका कार्यकाल एक वर्ष होता है और कोई मंत्री इसका सदस्य नहीं हो सकता है अध्यक्ष लोकसभा अध्यक्ष द्वारा लोकसभा सदस्योंमे से ही चुना जाता है जोकि सत्ता पक्ष से होता है। 
सिमित का मुख्य कार्य बजट में शामिल प्राक्कलनों की जांच करना और सार्वजनिक ब्यय में किफ़ायत का सुझाव देना। 

सार्वजनिक उद्दम सिमित- 

इसका गठन 1984 में कृष्ण मेनन सिमित के सिफारिस पर किया गया था और इसके सदस्यों की संख्या 22 है जिनका चुनाव उपर्युक्त सिमितयों के सदस्यों की तरह ही होता है कार्यकाल एक वर्ष एवं कोई मंत्री नियुक्त नहीं हो सकता है और इसके अध्यक्ष का चुनाव लोकसभा सदस्यों में से लोकसभा अध्यक्ष करता है। 
इसका मुख्य कार्य सार्वजनिक उद्दमो के प्रतिवेदन एवं लेखा की जांच करना ,सार्वजनिक उद्दमों पर महालेखा परीक्षक के प्रतिवेदनों की जांच करना ,और यह भी जांच करती है की सार्वजनिक उद्दमों का संचालन एवं प्रबंधन सुचारु रूप से किया जा रहा है या नहीं। 


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