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उच्चतम न्यायालय/Supreme Court-Indian Polity(IAS,PCS,SSC)

उच्चतम न्यायालय -

भारतीय संविधान ने एकीकृत न्याय ब्यवस्था की स्थापना  की है जिसमे सबसे ऊपर स्थान उच्तम न्यायालय का फिर उच्च न्यायलय का उसके बाद अधीनस्थ न्ययालय आते हैं। 
संविधान के भाग पांच के अनुच्छेद 124 से 147 तक इसके गठन स्वतंत्रता ,न्यायक्षेत्र शक्तियां आदि का उल्लेख्य किया गया है। 

उच्चतम न्यायालय का गठन -

इस समय उच्चतम न्यायालय में 34 न्यायाधीश हैं एक मुख्य और 33 अन्य न्यायधीश हैं जिनकी नियुक्ति  राष्ट्रपति करता है  न्यायधीश की नियुक्ति राष्ट्पति वरिष्ठता एवं अन्य न्यायधीश और उच्च न्यायालय के न्यायधीशों के परामर्श से करता है और अन्य न्यायधीशों के नियुक्ति में मुख्य न्यायधीश की सलाह लेता है। 

योग्यता- 

उच्चतम न्यायालय का न्यायधीश बनने के लिए कुछ योग्यताओं का निर्धारण किया गया है  प्रकार हैं -;
उसे भारत का नागरिक होना चाहिए,किसी उच्च न्यायालय का कम से कम पांच साल के लिए न्यायधीश होना चाहिए ,उचतम न्यायालय एवं बिभिन्न न्यायालयों में मिलाकर 10 शाल तक वकील रह चूका हो ,राष्ट्रपति के मत में सम्मानित न्यायवादी होना चाहिए। 
इसके बाद नियुक्ति से पहले न्यायाधीशों को राष्ट्रपति के सामने सपथ  लेनी होती है की संविधान के प्रति सच्ची निष्ठा रखूँगा,भारत की प्रभुता एवं अखंडता को बनाये रखूँगा ,अपनी योग्यता एवं ज्ञान से भेदभाव के बिना अपने पद के कर्ताओं का  करूँगा। 

कार्यकाल-

संविधान में इनका कार्यकाल तय नहीं किया गया है पर यह उपबंध है की न्यायधीश 65 की उम्र तक अपने पद पर बना रह सकता है ,राष्ट्रपति को लिखित त्यागपत्र दे सकता है ,संसद के सिफारिश पर राष्ट्रपति के द्वारा न्यायधीश को हटाया जा सकता है। 

न्यायधीश पर महाभियोग -

उच्चातम न्यायालय के न्यायधीश को राष्ट्रपति के द्वारा तभी हटाया जा सकता है जब उसके हटाने का आधार दूरब्योहार  एवं सिद्ध कदाचार हो और ऐसा प्रस्ताव संसद में 2 /3 बहुमत से पारित हो पर ये प्रस्ताव लाने के लिए कुछ शर्त निर्धारित की गई है। 
(1)निष्काशन प्रस्ताव 100 सदस्यों लोकसभा के मामले में और 50 सदस्य राजयसभा के मामले में हस्ताक्षर के बाद अध्यक्ष या सभापति को दिया जाए। 
(2)इस प्रस्ताव को अध्यक्ष या सभापति के द्वारा स्वीकार भी  किया जा सकता या अस्वीकार। 
(3)स्वीकार करने पर तीन सदस्यीय सिमित का गठन किया जाएगा। 
(4)सिमित में शामिल होंगे ,उच्चतम न्यायालय का मुख्य न्यायधीश ,अन्य न्यायधीश,एवं उच्च न्यायालय का मुख्य न्यायाधीश। 
( 3 )विशेष बहुमत से दोनों सदनों में प्रस्ताव पारित कर राष्ट्रपति को भेजा जाता है और राष्ट्रपति न्यायाधीश को हटाने का आदेश जारी करता है। 
न्यायाधीशों के वेतन भत्ते संचित निधि पर भारत होते हैं और इनमे अनावस्यक कटौती नहीं की  सकती। 

उच्चतम न्यायालय की शक्ति -

संविधान इसे ब्यापक शक्तियां दी है यह अपील का अंतिम न्यायालय है भारत के नागरिकों के मूल अधिकारों का रक्षक है और यह परामर्श की सर्वोच्च शक्ति है संघीय विवादों का निपटारा यही करता है चाहे विवाद संघ एवं राज्य के बीच हो या कई अन्य राज्य समूह एवं संघ के बीच हो  अपीलीय न्यायालय है  द्वारा दिया गया फैसला हर न्यायालय को बाध्यकारी है यह किसी भी अन्य न्यायालय में लंबित पड़े मामले को अपन पास माँगा सकता है और उसका निपटारा कर सकता है और अनुच्छेद 143 राष्ट्रपति को दो मामलों में उच्चतम न्यायालय से सलाह लेने का अधिकार देता है -सार्वजनिक महत्त्व के किसी मामले पर ,किसी पूर्व संवैधानिक संधि,समझौते,आदि मामलों पर किसी विवाद के उत्पन्न होने पर ,पहले मामले में अपनी सलाह दे भी सकता है या देने से नकार भी कर  सकता है पर दूसरे मामले में अपनी सलाह देना अनिवार्य है। और दोनों मामलों में उच्चतम न्यायालय द्वारा दी गई सलाह मानने को राष्ट्रपति बाध्य नहीं है। 
उच्चतम न्यायलय एक अभिलेखीय न्यायलय है इसके द्वारा सुनाये गए फैसले को साक्ष्य के तर पर रखा जाता है ,और इसके फैसले की अवमानना करने पारर दादित करने का अधिका है। 
इसके पास न्यायिक समीक्षा की सकती है जिसका मतलब संसद द्वारा पारित किसी विधेयक या कानून की समीक्षा कर सकत है उस कानून की उपयोगिता की जांच कर सकता है ,और यह अपने द्वारा दिए गए स्वतः के फैसले की भी समीक्षा कर सकता है और उसको बदल सकता है। 


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