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मई, 2020 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं

राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग/National Human Right Comission -Indian Polity

राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (National Human Right Commission ) राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग एक सांविधिक निकाय है जिसका गठन संसद में पारित अधिनियम के तहत हुआ है मानवाधिकार संरक्षण अधिनियम 1993 ये आयोग देश में मानवाधिकार का रक्षक है इसके स्थापना के मुख्य उद्देश्य इस प्रकार हैं -; (1) उन संस्थागत ब्यवस्थाओं को मजबूत करना जिसके द्वारा मानवाधिकार की मुद्दे का पूर्णरूप से समाधान किया जा सके।  (2) अधिकारों के हनन को सरकार से स्वतंत्र रूप में देखना  ताकि सरकार का ध्यान मानवाधिकारों की रक्षा की प्रतिबद्धता पर केंद्रित किया जा सके।  (3) इस डिसा में किये गए प्रयासों को ससक्त बनाना।  राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग की संरचना - आयोग बहुसदस्यीय संस्था है जिसमे एक अध्यक्ष और चार  अन्य सदस्य होते हैं आयोग का अध्यक्ष भारत का कोई सेवानिवृत मुख्य न्यायाधीश होना चाहिए और एक सदस्य उच्चतम  न्यायालय में कार्यरत या सेवा निवृत न्यायाधीश होना चाहिए एक उच्च न्यायलय का कार्यरत या सेवा निवृत मुख्य न्यायाधीश होना चाहिए और दो अन्य सदस्यों को मानवाधिकार सम्बंधित जानकारी होनी चाहिए इसके अलावा आयोग में चार अन्य पदेन सदस्य होते …

राज्य का महाधिवक्ता/Advocate General Of The State - Indian Polity

राज्य का महाधिवक्ता - भारत के संविधान के अनुछद 165 में राज्य के महाधिवक्ता की ब्यवस्था की गयी है जोकि राज्य का सर्वोच्च कानून अधिकारी होता है।  नियुक्ति - महाधिवक्ता की नियुक्ति राज्य के राज़्यपाल के द्वारा की जाती है और जो ब्यक्ति नियुक्त किया जाता है उस ब्यक्ति में उच्च न्यायालय का न्यायाधीश बनने की योग्यता होनी चाहिए।दूसरे शब्दों में कहें तो उसे भारत का नागरिक होना चाहिए  और उसे 10 वर्ष तक न्यायिक अधिकारी या उच्च न्यायालय में 10 वर्ष का वकालत का अनुभव होना चाहिए।  कार्यकाल- संविधान द्वारा महाधिवक्ता का कार्यकाल निश्चित नहीं किया गया है इसके अलावा संवधन में उसको हटाने का वर्णन भी नहीं किया गया है लेकिन वह अपने पद पर राज़्यपाल के प्रसाद पर्यन्त पद पर बना रहता है। इसका तात्पर्य है की उसे राज़्यपाल द्वारा कभी भी हटाया जा सकता है और वह अपने पद से त्यागपत्र भी देकर पदमुक्त हो सकता है आमतौर पर त्यागपत्र वह तब देता है जब राज्य मंत्रपरिषद त्यागपत्र देती है क्यूंकि उसकी नियुक्ति  सलाह पर ही होती है।  शक्ति एवं कार्य- राज्य के मुख्य कानून अधिकारी के तौर पर महाधिवक्ता के कार्य कुछ इस प्रकार हैं।…

भारत के महान्यायवादी /Attorney General Of India - Indian Polity

भारत के महान्यायवादी - संविधान के अनुच्छेद 76 में भारत के महान्यायवादी का उल्लेख्य किया गया है जोकि देश का सर्वोच्च कानून अधिकारी होता है जिसकी नियुक्ति राष्ट्रपति के द्वारा की जाती है भारत के महान्यायवादी के पद पर नियुक्त होने के लिए वही योग्यता निर्धारित की गयी है जो उच्चतम न्यायालय के न्यायधीश नियुक्त होने की है मतलब उसके लिए यह जरूरी है की वह भारत का नागरिक हो,उच्च न्यायालय में न्यायाधीश के रूप में काम करने का पांच वर्ष का अनुभव हो या फिर किसी उच्च न्यायालय में वकालत का 10 वर्ष का अनुभव हो और राष्ट्रपति के मुताबिक न्यायिक मामलों का योग्य ब्यक्ति हो।  कार्यकाल - महान्यायवादी के कार्यकाल को संविधान द्वारा निर्धारित नहीं किया गया है और उसको हटाने की भी कोई ब्यवस्था संविधान में नहीं की गयी है न्यायवादी अपने पद पर राष्ट्रपति के प्रसादपर्यन्त बना रहता है जिसका मतलब है की राष्ट्रपति द्वारा उसे किसी भी समय हटाया जा सकता है। और न्यायवादी राष्ट्पति को त्यागपत्र देकर किसी भी अपने पद से पदमुक्त हो सकता है सरकार के त्यागपत्र दे देने पर उसे भी पद खाली करना पड़ता है क्यूंकि न्यायवादी की नियुक्ति…

भारत का नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक/Copmptroller and Auditor Genral Of India -Indian polity

भारत का नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक - संविधान के अनुच्छेद 148 में नियंत्रक महालेखा परीक्षक के स्वतंत्र पद का उल्लेख्य किया गया है जोकि भारतीय लेखा विभाग का मुखिया होता है जोकि लोक वित्त का संरक्षक होने के साथ साथ देश के सम्पूर्ण वित्तीय ब्यवस्था का नियंत्रक होता है और इसका नियंत्रण राज्य एवं केंद्र दोनों स्तर पर होता है और यह लोक तांत्रिक ब्यवस्था में भारत सरकार के रक्षकों में से एक है।  नियुक्ति एवं कार्यकाल - महालेखा परीक्षक की नियुक्ति राष्ट्रपति के द्वारा की जाती है जिसे कार्यभार सँभालने से पहले राष्ट्पति के सामने सपथ लेनी पड़ती है -; संविधान के प्रति निष्ठा रखेगा,एकता और अखंडता को बनाये रखेगा ,भय और पक्ष पात के बिना पूरी योग्यता से अपने पद का निर्वहन करेगा। महालेखा परीक्षक का कार्यकाल 6 वर्ष या 65 की उम्र तक होता है पर इससे पहले भी वह राष्ट्रपति को अपना त्यागपत्र दे सकता है और राष्ट्रपति द्वारा इसे उसी तरह हटाया जा सकता है जैसे उच्चतम न्यायलय के न्यायाधीश को।  नोट -कोई भी मंत्री संसद के दोनों सदनों में महालेखा परीक्षक का प्रतिनिधित्व नहीं कर सकता है एवं कोई मंत्री उसके द्वारा किय…

अनसूचित जाति एवं जनजाति के लिए राष्ट्रीय आयोग /National Commission For Scs & STs - Indian Polity

अनसूचित जाति एवं जनजाति के लिए राष्ट्रीय आयोग - राष्ट्रीय अनसूचित आयोग एक संवैधानिक निकाय है जिसका गठन संविधान के अनुच्छेद 338 के तहत किया गया है इसमें एक अध्यक्ष और उपाध्यक्ष एवं तीन अन्य सदस्य होते हैं यानी की ये एक बहुसदस्यीय निकाय है जिनकी नियुक्ति राष्ट्रपति द्वारा उसके आदेश एवं मोहर लगे पात्र द्वारा की जाती है और इनकी सेवा शर्तें एवं कार्यकाल राष्ट्रपति द्वारा निर्धारित किये जाते हैं।  आयोग के कार्य - (1) अनसूचित जातियों के संवैधानिक संरक्षण से सम्बंधित सभी मामलों का निरीक्षण एवं अधीक्षण करना ,अनसूचित जातियों के हितों का उल्लंघन करने वाले किसी मामले की जांच पड़ताल एवं सुनवाई करना।  (2) अनसूचित जातियों के सामाजिक विकाश से सम्बंधित योजनाओं के निर्माड के समय सहभागिता करना एवं परामर्श देना और उनके विकाश से सम्बंधित कार्यों का मूल्यांकन करना।  (3) संरक्षण के सम्बन्ध में उठाये गए क़दमों के बारे में राष्ट्रपति को प्रतिवेदन प्रस्तुत करना ,इनके संरक्षण हेतु केंद्र एवं राज्य सरकार द्वारा उठाये गए क़दमों की समीक्षा करना और उचित सिफारिस करना।  (4) राष्ट्रपति के आदेश पर अनसूचित जातियों के सामा…

वित्त आयोग /Finance Commission- Indian Polity

वित्त आयोग - संविधान में अनुच्छेद 280 के अंतर्गत अर्ध न्यायिक संस्था के रूप में वित्त आयोग की ब्यवस्था की गयी है जिसका गठन राष्ट्रपति के द्वारा हर पांचवे वर्ष किया जाता है। जिसमे एक अध्यक्ष और चार अन्य सदस्य होते हैं यानि की वित्त आयोग बहु सदस्यीय संस्था है जिनकी नियुक्त राष्ट्रपति के द्वारा की जाती है और इनके कार्यकाल का निर्धारण राष्ट्रपति ही करता है और इनकी पुनर्नियुक्ति भी हो सकती है।  योग्यता - संविधान ने संसद को इन सदस्यों की योग्यता का निर्धारण का अधिकार दिया है जिसके तहत संसद ने आयोग के अध्यक्ष एवं सदस्यों की विशेष विशेष योग्यताओं का निर्धारण किया गया है  अध्यक्ष सार्वजनिक मामलों का अनुभवी होना चाहिए , एक सदस्य उच्च न्यायालय का न्यायधीश या इस पद के योग्य ब्यक्ति।  दूसरा सदस्य जिसे भारत के लेखा एवं वित्त मामलों का विशेष ज्ञान हो।  तीसरा सदस्य जिसे प्रशासन एवं वित्तीय मामलों का अनुभव हो।  चौथा सदस्य अर्थसास्त्र का विशेष ज्ञाता हो।  कार्य - वित्त आयोग राष्ट्रपति को इन मामलों में सिफारिस करता है -; (1) संघ और राज्यों के बीच करों के सुद्ध आगमों का वितरण और राज्यों के बीच ऐसे आगमों…

संघ लोकसेवा आयोग /Union Public Service Commission- Indian Polity

संघ लोकसेवा आयोग - संघ लोकसेवा आयोग भारत का केंद्रीय भर्ती संस्था है जोकि एक स्वतंत्र एवं संवैधानिक संस्था है जिसका उल्लेख्य संविधान के भाग 14 के अनुच्छेद 315 से 323 तक इसके शक्ति एवं कार्य और इसके सदस्यों की नियुक्ति आदि का उल्लेख्य किया गया है।  आयोग की संरचना- संघ लोकसेवा आयोगमे एक अध्यक्ष एवं कुछ अन्य सदस्य होते हैं पर इनकी संख्या अध्यक्ष सहित 10 से 11 तक हो सकती है जोकि भारत के राष्ट्रपति द्वारा नियुक्त होते हैं पर आयोग के सदस्यों की योग्यता का कोई उल्लेख्य नहीं किया गया है लेकिन आयोग के आधे सदस्यों को भारत या राज्य सरकार के आधीन 10 वर्ष तक काम करने का अनुभव हो।  इनका कार्यकाल 6 वर्ष या 65 की उम्र तक होता है जो भी पहले पूरा हो पर वे कभी भी रस्ट्रपति को अपना  त्यागपत्र सौंप सकते हैं या उन्हें कार्यकाल से पहले राष्ट्रपति के द्वारा हटाया जा सकता है।  निष्कासन - राष्ट्रपति संघ लोकसेवा आयोग के सदस्यों को इन परिस्थितियों में हटा सकता है -; उसे दीवालिया घोषित कर दिया जाता है ,अपने पद के दौरान किसी और लाभ के पद में लगा हो ,यदि राष्ट्रपति समझता है की वह मानशिक या अछमता के कारण पद पर बने …