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भारतीय अपवाह तंत्र/Indian Drainage system-Indian Geography

भारतीय अपवाह तंत्र (Indian dranage system ) सबसे पहले जानते हैं की अपवाह किसे कहते हैं तो जवाब है निश्चित वाहिकाओं के माध्यम से हो रहे जलप्रवाह को अपवाह कहते हैं और इन्हीं वाहिकाओं के जाल को अपवाह तंत्र कहते हैं। और इनका एक अपना स्वरुप होता है जिसमे मैं कुछ मुख्य अपवाह प्रतिरूप का उल्लेख्य करने जा रहा हूँ।  (1) जो अपवाह प्रतिरूप पेंड़ की शाखाओं के सामान हो उसे वृक्षाकार प्रतिरूप कहा जाता है।  (2) जब नदियाँ पर्वत से निकलकर सभी दिशाओं में बहती हैं उसे अरीय प्रतिरूप कहते हैं।  (3) जब मुख्य  नदियां एक दुसरे के सामानांतर बहती बहती हों और सहायक नदियां समकोण पे मिले तो ऐसे प्रतिरूप को जालीनुमा कहते हैं।  (4) जब सभी दिशाओं से नदियाँ बहकर किसी झील में विसर्जित होती हैं टी इसे अभिकेंद्रिय प्रतिरूप कहते हैं।  नदी एवं उसकी सहायक नदियों द्वारा अपवाहित क्षेत्र को अपवाह द्रोणी कहते हैं। और एक अपवाह द्रोणी से दुसरे को अलग करने वाली सीमा को जल विभाजक कहते हैं। और छोटी नदियों एवं नालों द्वारा अपवाहित क्षेत्र को जल सांभर कहते हैं।  भारतीय अपवाह तंत्र को विसर्जन के आधार पर दो भागों में बांटा जा सकता है अ…

भारतीय मरुस्थल एवं द्वीप समूह/Indian Deserts And Islands-Indian Geography

भारतीय मरुस्थल एवं द्वीप समूह - भारतीय मरुस्थल - आज हम बात  हैं भारत के विशाल मरुस्थल के बारे में जोकि अरावली पहाड़ी के उत्तर पूर्व में स्थित है जोकि  ऊबड़ खाबड़ भूखंड हैं जिस पर बहुत से रेतीले टीले और बरखान पाए जाते हैं और यहां पर वार्षिक वर्षा 150 मिलीमीटर से काम होती है जसकी वजह से यह क्षेत्र शुष्क एवं बनस्पति से विहीन है जिसके इसे मरुस्थल कहा जाता है। लेकिन यह माना जाता है की मोसोजोइक काल में यह समुद्र का हिस्सा था जिसकी पुस्टि जीवाश्म निक्षेपों के पाए। यहां की प्रमुख स्थलकृतियाँ रेतीले टीले,छत्रक, चट्टान हैं ढाल के आधार पर मरुस्थल को दो  भागों में बांटा जा सकता है सिंध की ओर ढाल वाला उत्तरी भाग एवं कच्छ की ओर ढाल वाला दक्षिणी भाग और यहां की महत्वपूर्ण नदी लूनी है।  तटीय मैदान- भारत की तट रेखा बहुत लम्बी है जिसे दो भागों में बांटा जा सकता है -पश्चिमी तटीय मैदान एवं पूर्वी तटीय मैदान जिसमे पश्चिमी तटीय मैदान जलमग्न तटीय मैदानों का अच्छा उदाहरण है जलमग्न होने की वजह से पश्चिमी तटीय मैदान एक संकीर्ण पट्टी मात्रा है जिसके कारण बंदरगाह विकाश के लिए प्राकृतिक परिस्थित प्रदान करता है यहां …

भारत की संरचना एवं भूआकार (उत्तर भारत का मैदान/Structure And Landscape Of India (Plane Of North India )

भारत की संरचना एवं भूआकार (उत्तर भारत का मैदान ) उत्तर भारत का मैदान सिंधु एवं गनगा और ब्रह्मपुत्र नदियों के द्वारा बहाकर लाये गए जलोढ़ से बना है और उत्तर भारत के इस मैदान की पूर्व से पश्चिम लम्बाई 3200 किलोमीटर है और चौड़ाई 150 से 300 किलोमीटर है और इस जलोढ़ की गहराई 1000 से 2000 मीटर है और उतर से दक्षिण इस मैदान को तीन भाग में बाँट सकते हैं भाभर ,तराई,और जलोढ़ मैदान और जलोढ़ मैदान को दो भागों में बाँट सकते हैं पुराना जलोढ़ बांगर कहलाता है और नया जलोढ़ मैदान खादर कहलाता है।  भाभर - यह 8 से 10 किलोमीटर चौड़ी पट्टी है जो शिवालिक के सामानांतर फैली हुई है हिमालय से निकलती हुई नदियां यहां पर अपने साथ लाये हुए कंकड़ पत्थर एवं शैल को जमा कर देती हैं और स्वयं इन कंकड़ पत्थर में लुप्त हो जाती हैं और भाभर के दक्षिण में तराई क्षेत्र हैं जहां भाभर में लुप्त नदियां  फिर से धरातल पर निकल आती हैं तराई की चौड़ाई 10 से 20 किलोमीटर है तराई क्षेत्र बनस्पति से घिरा हुआ विभिन्न प्राणियों का घर है और तराई  दक्षिण में मैदान है जोकि जलोढ़ निर्मित है।  उत्तर  बहने वाली नदियां अपने मुहाने पर डेल्टा का निर्माण करती हैं ज…

भारत की संरचना एवं भूआकृत -/Structure and Landscape of India- Indian Geography

भारत की संरचना एवं भूआकृत - वर्तमान अनुमान के अनुसार पृथवी की आयु लगभग 46 करोड़ वर्ष है और इतने लम्बे समय में भीतरी और बाहरी बलों से कई परिवर्तन हुए हैं इसमें करोड़ों वर्ष पहले इंडियन प्लेट भूमध्य रेखा से दक्षिण में स्थित थी और आकर में काफी बड़ी थी और ऑस्ट्रेलियन प्लेट इसी का हिस्सा थी लेकिन करोड़ों वर्षों के दौरान यह प्लेट काफी हिस्सों में  टूट गयी और ऑस्ट्रेलियन प्लेट दक्षिण पूर्व तथा इंडियन प्लेट उत्तर दिशा की ओर खिसकने लगी और इसका खिसकना अभी तक जारी है। भू संरचना एवं शैल समूहों के भिन्नता के आधार पर भारत को तीन भागों में विभाजित किया जाता है।  प्रायद्वीपीय खंड - प्रायद्वीपीय खंड  की उत्तरी सीमा कटी फटी है जो कच्छ से सुरु होकर अरावली पहाड़ी के पश्चिम से गुजरती हुई दिल्ली तक  एवं गंगा नदी के सामानांतर राजमहल की पहाड़ियों एवं गंगा डेल्टा तक जाती है इसके आलावा उत्तर पूर्व में कार्बी ऐंगलोंग एवं मेघालय के पठार एवं पश्चिम में राजस्थान तक इसका विस्तार है। पश्चिम बंगाल में स्थित  मालदा भ्रंस मझले एवं कार्बी ऐंगलोंग पठार को नागपुर पत्थर से अलग करता है। और यह पठारीय क्षेत्र ग्रेनाईट से बना है।  …

भारत का भूगोल और उसकी वर्तमान स्थिति -/Geography Of India -Indian Georaphy

भारत का भूगोल और उसकी वर्तमान स्थिति - भारत की मुख्य भूमि उतार दिशा में कश्मीर से लेकर दक्षिण में कन्याकुमारी तक एवं पूर्व में अरुणांचल प्रदेश से लेकर पश्चिम में गुजरात तक फैली हुई है और इस तरह भारत के सीमा के अंतर्गत 21. 9 किलोमीटर तक का समुद्री क्षेत्र भी आता है। और हमारे देश की दक्षिणी सीमा बंगाल की खाड़ी में 6 डिग्री 45 उत्तर अक्षांश के साथ निर्धारित है। एवं भारत के अक्षांशीय और देशांतरीय विस्तार लगभग 30 डिग्री है।   उत्तर से दक्षिण तक इसकी दूरी 3214 किलोमीटर है और पूर्व से पश्चिम तक इसकी दूरी 2933 किलोमीटर है इस अंतर का कारण इस तथ्य पर आधारित है की ध्रुवों की ओर जाते समय दो देशांतर रेखाओं के बीच की दूरी घटती जाती है। जबकि दो अक्षांश रेखाओं की दूरी हर जगह एक सामान रहती है। और भारत का दक्षिणी हिस्सा उष्ण कटिबंध में और उत्तरी हिस्सा शीतोष्ण कटिबंध में स्थित है। और यही स्थिति भारत में बिभिन्नताओं के लिए जिम्मेदार है जैसे जलवायु ,मिट्टी,भूआकार एवं बिभिन्न प्रकार की उत्पन्न होने वाली फसलें।  भारत के सबसे पश्चिमी और पूर्वी भाग में समय का दो घंटे का अंतर है।  भारत की मानक याम्योत्तर 82 ड…