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भारतीय अपवाह तंत्र/Indian Drainage system-Indian Geography

भारतीय अपवाह तंत्र (Indian dranage system )

सबसे पहले जानते हैं की अपवाह किसे कहते हैं तो जवाब है निश्चित वाहिकाओं के माध्यम से हो रहे जलप्रवाह को अपवाह कहते हैं और इन्हीं वाहिकाओं के जाल को अपवाह तंत्र कहते हैं। और इनका एक अपना स्वरुप होता है जिसमे मैं कुछ मुख्य अपवाह प्रतिरूप का उल्लेख्य करने जा रहा हूँ। 
(1) जो अपवाह प्रतिरूप पेंड़ की शाखाओं के सामान हो उसे वृक्षाकार प्रतिरूप कहा जाता है। 
(2) जब नदियाँ पर्वत से निकलकर सभी दिशाओं में बहती हैं उसे अरीय प्रतिरूप कहते हैं। 
(3) जब मुख्य  नदियां एक दुसरे के सामानांतर बहती बहती हों और सहायक नदियां समकोण पे मिले तो ऐसे प्रतिरूप को जालीनुमा कहते हैं। 
(4) जब सभी दिशाओं से नदियाँ बहकर किसी झील में विसर्जित होती हैं टी इसे अभिकेंद्रिय प्रतिरूप कहते हैं। 
नदी एवं उसकी सहायक नदियों द्वारा अपवाहित क्षेत्र को अपवाह द्रोणी कहते हैं। और एक अपवाह द्रोणी से दुसरे को अलग करने वाली सीमा को जल विभाजक कहते हैं। और छोटी नदियों एवं नालों द्वारा अपवाहित क्षेत्र को जल सांभर कहते हैं। 
भारतीय अपवाह तंत्र को विसर्जन के आधार पर दो भागों में बांटा जा सकता है अरबसागर का अपवाह तंत्र एवं बंगाल की खाड़ी  का अपवाह तंत्र जिसमे कुल अपवाह क्षेत्र का 77% बंगाल की खाड़ी में विसर्जित होता है और 23 % अरबसागर में। 
उद्गम एवं प्राकृतिक आधार पर भारतीय अपवाह को दो भागों में विभाजित किया जाता है हिमालयी अपवाह तंत्र और प्रायद्वीपीय अपवाह तंत्र। 

हिमालयी अपवाहतंत्र -

हिमालयी अपवाहतंत्र में मुख्यरूप से गंगा सिंधु और ब्रह्मपुत्र नदी द्रोणी शामिल हैं और यहां से निकलने वाली नदियाँ बारहमासी होती हैं क्यूंकि इनको बारिश और बर्फ पिघलने से जल प्राप्त होता है और ये नदियाँ अपने बहाव के साथ कई प्रकार के आकर का निर्माण करती है जैसे महाखड्ड,V आकर की घाटियाँ ,क्षिप्रिकाएँ और जलप्रपात,और अपने मुहाने पर डेल्टा का निर्माण करती हैं। 

सिंधु नदी तंत्र -

सिंधु नदी का क्षेत्रफल 11 लाख 65 हजार किलोमीटर है जिसमे भारत में इसका क्षेत्रफल 3 लाख 89 हजार 289 किलोमीटर है और इसकी कुल लम्बाई 2880 किलोमीटर है और भारत में इसकी लम्बाई 1114 किलोमीटर है  और इसका उदगम तिब्बत में कैलाश पर्वत श्रेणी में बोखर चू हिमनद से हुआ है जहां इसे सिंगी खंबान या शेर मुख कहते हैं। 
सहायक नदियाँ - श्योक,गिलगित,जास्कर,हुंजा,नूबरा शिगार ,गास्टिंग ,द्राक्ष और इससे दाहिने तट पर मिलने वाली नदियाँ काबुल,खुर्रम,गोमल,तोचि,विबोआ एवं संगर है और मिथानकोट में यह पंचनद का जल प्राप्त करती है। जिसमे पंजाब की पांच नदियां आती हैं सतलुज ,ब्यास,रावी,चेनाब,झेलम। झेलम कश्मीर घाटी के पीरपंजाल श्रेणी में स्थित वेरीनाग झील से निकलती है और चेनाब नदी का निर्माण चंद्रा और भागा दो नदियों के मिलने से हुआ है जोकि हिमाँचल प्रदेश के तांडी में आपस में मिलती हैं और रावी का उदगम हिमांचल प्रदेश के कुल्लू पहाड़ी के रोहतांग दर्रे के पश्चिम से हुआ है और ब्यास का उदगम रोहतांग दर्रे के पास में स्थित ब्यासकुंड से हुआ है जोकि धौलाधार श्रेणी में काती एवं लारगी महाखड्ड का निर्माण करती है। सतलुज का उदगम मानसरोवर के निकट राक्षस ताल से हुआ है जहां इसे लांगचेन खंबाब के नाम से जाना जाता है।

गंगा नदी तंत्र-

यह भारत की महत्वपूर्ण नदी है जिसका उदगम उत्तराखंड के उत्तरकाशी जिले के गोमुख के निकट गंगोत्री हिमनद से हुआ है जहां इसे भागीरथी के नाम से जाना जाता है और देवप्रयाग में अलकनंदा से मिलकर गंगा कहलाती है और अलकनंदा का उदगम बद्रीनाथ के ऊपर सतोपथ हिमनद है अलकनंदा का निर्माण धौली और विष्णुगंगा दो धाराओं से मिलकर हुआ है  जोशीमठ विष्णुप्रयाग में  मिलती है फिर अलकनंदा से कर्णप्रयाग में पिंडार आके मिलती है फिर आगे जाकर अलकनंदा से मन्दाकिनी रुद्रप्रयाग में मिलती है। 
गंगा की कुल लम्बाई 2525 किलोमीटर है और यह भारत में बहने वाली सबसे बड़ी नदी तंत्र है  इसकी सबसे बड़ी सहायक नदी यमुना है जिसका उदगम यमुनोत्री हिमनद है। 

सहायक नदी -

दाहिने से सोन इसकी सबसे बड़ी सहायक है और बांये से मिलने वाली नदियां रामगंगा,गोमती घाघरा , कोशी ,गंडक एवं महानंदा है और अंत में जाकर बंगाल की खाड़ी में विसर्जित होता है। 
गंडक नदी का उदगम काली गंडक और त्रिशूलगंगा दो धाराओं से हुआ है जोकि नेपाल हिमालय और धौलागिरी के बीच से निकलती है। 

ब्रह्मपुत्र नदी तंत्र -

ब्रह्पुत्र का उदगम कैलाश पर्वत श्रेणी में मानसरोवर के निकट चेमयुंगडुंग हिमनद से हुआ है और तिब्बत में इसे सांग्पो के नाम से जानी जाती है और तिब्बत में रंगोसांगपो दाहिने तट ी इसकी एक सहायक  है नामचा बरवा के समीप गार्ज बनाती हुई भारत में प्रवेश करती है जहां इसे सिसंग या दिसंग के नाम से जाना जाता है और असम में आकर ब्रह्मपुत्र कहलाती है। 

सहायक नदियां -

ब्रह्मपुत्र की प्रमुख सहायक नदियां बांये तट से दिबांग,सिकांग,लोहित,बूढी,दिहिंग,धनसारी हैं। 
और दांये तट से इसकी सहायक सुबनसिरी,कामेंग,मानस,संकोसा,और विश्व प्रसिद्ध माजुली द्वीप  ब्रह्मपुत्र नदी पर स्थित है। 

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