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भारत की संरचना एवं भूआकृत -/Structure and Landscape of India- Indian Geography

भारत की संरचना एवं भूआकृत -

वर्तमान अनुमान के अनुसार पृथवी की आयु लगभग 46 करोड़ वर्ष है और इतने लम्बे समय में भीतरी और बाहरी बलों से कई परिवर्तन हुए हैं इसमें करोड़ों वर्ष पहले इंडियन प्लेट भूमध्य रेखा से दक्षिण में स्थित थी और आकर में काफी बड़ी थी और ऑस्ट्रेलियन प्लेट इसी का हिस्सा थी लेकिन करोड़ों वर्षों के दौरान यह प्लेट काफी हिस्सों में  टूट गयी और ऑस्ट्रेलियन प्लेट दक्षिण पूर्व तथा इंडियन प्लेट उत्तर दिशा की ओर खिसकने लगी और इसका खिसकना अभी तक जारी है। भू संरचना एवं शैल समूहों के भिन्नता के आधार पर भारत को तीन भागों में विभाजित किया जाता है। 

प्रायद्वीपीय खंड -

प्रायद्वीपीय खंड  की उत्तरी सीमा कटी फटी है जो कच्छ से सुरु होकर अरावली पहाड़ी के पश्चिम से गुजरती हुई दिल्ली तक  एवं गंगा नदी के सामानांतर राजमहल की पहाड़ियों एवं गंगा डेल्टा तक जाती है इसके आलावा उत्तर पूर्व में कार्बी ऐंगलोंग एवं मेघालय के पठार एवं पश्चिम में राजस्थान तक इसका विस्तार है। पश्चिम बंगाल में स्थित  मालदा भ्रंस मझले एवं कार्बी ऐंगलोंग पठार को नागपुर पत्थर से अलग करता है। और यह पठारीय क्षेत्र ग्रेनाईट से बना है। 
प्रायद्वीप में कुछ अवशिस्ट पहाड़ियां स्थित हैं अरावली,जवादी,वेलीकोण्डा,पालकोण्डा,नल्लामल्ला ,एवं महेन्द्रगिरि। 

सिंधु गंगा ब्रह्मपुत्र का मैदान -

इंटीनो नदियों का मैदान एक भू अभिनति  जिसका निर्माण हिमालय पर्वत निर्माण प्रक्रिया के तीसरे चरण में 6.4 करोड़ वर्ष पहले हुआ था तब से इसे हिमालय और प्रायद्वीप से निकलने वाली नदियाँ अपने साथ लाये अवसाद से पाट रही हैं और इन मैदानों में जलोढ़ की औसत गहराई 1000 से 2000 मीटर तक है। 

भूआकृत -

किसी स्थान की भूआकृत उसकी संरचना प्रक्रिया एवं विकाश की अवस्था का परिणाम है और भारत में भूआकृत विभिन्नताएं महत्वपूर्ण हैं जिकी इस प्रकार हैं। 

उत्तर तथा उत्तर पूर्वी पर्वतमालाएं -

उतार तथा उत्तर पूर्वी पर्वतमाला में हिमालय पर्वत और उत्तर पूर्वी पहाड़ियां शामिल हैं  हिमालय में कई सामानांतर पर्वत श्रृंखलाएं हैं और भारत के उत्तर पश्चिम भाग में हिमालय की श्रेणियां उत्तर पश्चिम दिशा से दक्षिण पूर्व की ओर फैली हैं और दार्जिलिंग एवं सिक्किम में पूर्व पश्चिम दिशा में और अरुणांचल प्रदेश में दक्षिण पश्चिम से उत्तर पश्चिम और मिजोरम, नागालैंड,मणिपुर में उत्तर दक्षिण दिशा में फैली हैं बृहत् हिमालय की पूर्व से पश्चिम लम्बाई लगभग 2500 और चौड़ाई उत्तर से दक्षिण 160 से 400 किलोमीटर है। 
हिमालय भारतीय उममहाद्वीप एवं मध्य एवं पूर्वी एशिया के देशों के बीच एक मजबूत दीवार का काम करता है। 

कश्मीर हिमालय -

कश्मीर हिमालय में अनेक पर्वत श्रेणियां हैं काराकोरम,लद्दाख,जास्कर,एवं पीरपंजाल इसका उत्तर पूर्वी भाग जोकि बृहत् हिमालय एवं काराकोरम के बीच स्थित है एक शीत मरुस्थल है और बृहत् एवं पीरपंजाल के बीच कश्मीर घाटी स्थित है और डल झील एवं बलटोरो और सियाचिन इसी में स्थित है और कश्मीर हिमालय करवा के लिए मशहूर है जहां जाफरान की खेती की जाती है। बृहत् हिमालय में जोजिला पीरपंजाल में बनिहाल और जास्कर में फोटुला और लद्दाख श्रेणी में खर्दुंगला  दर्रा स्थित है। 
महत्वपूर्ण मीठे पानी की झील डल एवं वूलर एवं खारे पानी की झील पैंगांग सो ,और सोमूरीरी यहीं पर हैं और इस क्षेत्र को सिंधु एवं उसकी सहायक झेलम एवं चेनाब अपवाहित करती हैं एवं कुछ प्रसिद्द तीर्थस्थल यहीं स्थित हैं जैसे - वैष्णो देवी,अमरनाथ गुफा,चरार -ए- शरीफ और श्रीनगर झेलम नदी के किनारे स्थित है। 

हिमांचल और उत्तराखंड हिमालय -

हिमालय का यह हिस्सा पश्चिम में रावी नदी और पूर्व में काली के बीच स्थित है और यह क्षेत्र भारत की दो मुख्य नदी तंत्रों सिंधु और गंगा द्वारा अपवाहित है हिमांचल हिमालय का उत्तरी भाग लद्दाख के ठन्डे मरुस्थल का विस्तार है हिमालय की तीनों मुख्य श्रृंखलाएं बृहत् हिमालय ,लघु हिमालय, जिन्हें  धौलाधार और उत्तराखंड में नागातीभा कहते हैं और उत्तर  दक्षिण दिशा में  फैली शिवालिक श्रेणी इसी हिमालयखण्ड में स्थित है। 
पर स्थित दो महत्वपूर्ण स्थलाकृतियां शिवालिक और दून है  महत्वपूर्ण दून चंडीगढ़ और कालका दून ,नालागढ़ दून ,देहरादून जोकि सबसे बड़ी घाटी है और इसमें भोटिया जनजाति के लोग निवेश करते हैं प्रसिद्द फूलों की घाटी इसी क्षेत्र में स्थित है गंगोत्री,यमुनोत्री,केदारनाथ ,बद्रीनाथ, एवं हेमकुंड यही पर स्थित हैं और यहीं पर पांच प्रयाग स्थित है 

दार्जिलिंग एवं सिक्किम हिमालय -

इसके पश्चिम में नेपाल हिमालय और पूर्व में भूटान हिमालय हैं यह छोटा एवं हिमालय का महत्वपूर्ण भाग है यहीं पर तीस्ता नदी बहती है और कंचनजुंगा जैसी ऊंची चोटियां एवं गहरी घाटियां पायी जाती हैं और यहीं पर लेपचा जनजाति निवेश करती है और यहां पर दुआर स्थलकृतियाँ पायी जाती हैं जिनका उपयोग चाय का बागान लगाने के लिए किया जाता है और सिक्किम एवं दार्जिलिंग हिमालय अपने वनस्पतिजात एवं प्राणिजात और ऑर्किड के लिए मशहूर है। 

अरुणांचल हिमालय -

यह भूटान हिमालय से लेकर पूर्व में दिफू दर्रे तक फैला है इसकी दिशा दक्षिण पूर्व से उत्तर पूर्व है और मुख्य चोटियों में काँगतु एवं नामचा बरवा शामिल है और नामचा बरवा को ही पार करने के बाद ब्रह्मपुत्र नदी गहरी गार्ज बनती है कामेंग,सुबनसिरी,दिहांग लोहित दिवांग आदि यहां की प्रमुख नदियाँ हैं यहां कुछ प्रमुख जनजातियां पायी जाती हैं जैसे मोनपा,अबोर,मिश्मी,निशि,नागा जोकि ज्यादातर झूम खेती करती हैं। 

पूर्वी पहाड़ियां -

यहां पर पहाड़ियों की दिशा उत्तर से दक्षिण है जिन्हे बिभिन्न नामों से जाना जाता है उत्तर में पटकाई बूम ,नागा पहाड़ियां ,माड़ीपुर  पहाड़ियां और दक्षिण में मिज़ो एवं लुशाई के नाम से जानी जाती हैं बराक मणिपुर एवं मिजोरम की मुख्य नदी है और मणिपुर घाटी में ही लोकटक झील स्थित है। 

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